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झारखंड व छत्तीसगढ़ से भागकर बिहार में पनाह ले रहे नक्सली

झारखंड और छत्तीसगढ़ में केंद्रीय सुरक्षा बलों द्वारा चलाए जा रहे कॉबिंग ऑपरेशन का साइड इफेक्ट बिहार के सीमावर्ती जिलों में भी पड़ सकता है।  खुफिया एजेंसियों ने बिहार पुलिस को आगाह किया है कि छत्तीसगढ़ व झारखंड के सीमावर्ती जिलों से माओवादी बिहार के उन सीमावर्ती जिलों में शरण ले रहे हैं,जो नक्सलियों के लिए लिबरेटेड जोन के रूप में जाना जाता है।

खुफिया एजेंसी के अलर्ट के बाद झारखंड से लगे बिहार के पांच नक्सल प्रभावित जिलों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। पांचों जिलों औरंगाबाद, गया, नवादा, जमुई और बांका में सीआरपीएफ, एसएसबी और जिला पुलिस बलों को हाइ अलर्ट कर दिया गया है। इन जिलों के सभी संवेदनशील स्थलों पर अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती कर दी गई है। खुफिया एजेंसियों ने यह भी आगाह किया कि अपना प्रभाव खो रहे नक्सली इन जिलों से गुजरने वाली ट्रेनों और खासकर रेलवे स्टेशन को अपना निशाना बना सकते हैं।

बता दें कि विगत 25 अप्रैल को छत्तीसगढ़ के सुकमा में नक्सलियों ने सीआरपीएफ के 25 जवानों की हत्या कर दी थी। इसके बाद झारखंड और छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती जिलों में दोनों राज्यों की पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों ने बड़े स्तर पर एंटी नक्सल ऑपरेशन शुरू कर रखा है।

इस ऑपरेशन का ही परिणाम है कि झारखंड में 15 लाख का इनामी कुंदन पाहन जैसे बड़े नक्सली कमांडर को आत्मसमर्पण करने को बाध्य होना पड़ा। इसके अलावा 10 लाख का इनामी रामसुंदर राम उर्फ आलोक जी झारखंड पुलिस के हत्थे चढ़ गया। राज्य पुलिस मुख्यालय के सूत्रों ने बताया कि छत्तीसगढ़ व झारखंड के सीमावर्ती जिलों और जंगलों में चल रहे एंटी नक्सल ऑपरेशन को लेकर बिहार के पांच जिलों को हाइ अलर्ट पर रखा गया है।

 




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