Trending
Search

एक और घोटाला

घोटाले बिहार का पीछा नहीं छोड़ रहे। करीब दो दशक पहले चारा घोटाले से शुरू हुआ सिलसिला भागलपुर ट्रेजरी घोटाले तक आ पहुंचा है। यह घोटाला इस मायने में अत्यधिक सनसनीखेज है कि जिले के भूअर्जन खाते की धनराशि एक एनजीओ के खाते में ट्रांसफर की जाती रही, जिसे एनजीओ सूद पर उठाकर धंधा कर रही थी। ये सिर्फ दो दिन की प्रारंभिक जांच के निष्कर्ष हैं जिसके आधार पर सात व्यक्ति गिरफ्तार भी कर लिए गए हैं। इतना ही नहीं, भागलपुर के अलावा सहरसा जिले में भी इसी तरह का घोटाला प्रकाश में आया है। इससे इस बात की आशंका प्रबल हो गई है कि राज्य के कई अन्य जिलों में इसी तर्ज पर सरकारी धन का घोटाला किया गया होगा। घोटाले की प्रारंभिक जानकारी खुद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सार्वजनिक की। इसके बाद जांच एजेंसियां हरकत में आईं। यह घोटाला कई वर्षो से जारी था।

अब तक हुई जांच में सिर्फ भागलपुर में घोटाला राशि 500-700 करोड़ रुपये होने का अनुमान है। यदि घोटाले का विस्तार सहरसा की तरह कई अन्य जिलों में भी रहा होगा तो स्वाभाविक रूप से धनराशि उसी अनुपात में बढ़ जाएगी। जाहिर है कि प्रणाली में कोई बड़ा सूराख है जिस पर किसी ने ध्यान नहीं दिया। उम्मीद की जानी चाहिए कि जांच में वह सूराख पकड़ में आएगा और उसे बंद किया जाएगा। अभी जो लोग गिरफ्तार हुए हैं उनमें भागलपुर के डीएम के पीए के अलावा एनजीओ के पदाधिकारी शामिल हैं यद्यपि जांच सही दिशा में आगे बढ़ी तो कई बड़े अधिकारी, जिनमें कुछ रिटायर भी हो चुके हैं, और राजनेता ‘कठघरे’ में आएंगे।

चूंकि इस भ्रष्टाचार का खुलासा खुद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने किया है, इसलिए भरोसा रखा जाना चाहिए कि जांच पूरी पारदर्शिता के साथ होगी और किसी भी पद या हैसियत का व्यक्ति जांच में बाधा नहीं डाल सकेगा। इस घटना से एक बार फिर राज्य की छवि पर दाग लगा है। इसकी जांच तेजी के साथ पूरी करके सभी दोषियों को कानून के कठघरे में खड़ा करके कठोर दंड दिलाया जाए तथा गबन की गई राशि वसूल करके सरकारी सरकारी खजाने में वापस लाई जाए।




Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *