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युवाओं में बढ़ता तनाव

युवाओं में तनाव इस कदर हावी हो रहा है कि वे जरा सा हताश होने पर अपनी जान से भी खेल जाते हैं। पिछले एक हफ्ते के दौरान जम्मू और उसके साथ लगते क्षेत्रों में करीब सात लोगों ने तनाव में आकर अपना बहुमूल्य जीवन खत्म कर दिया। इसे महज मूर्खता ही कहा जाएगा कि विगत दिवस एक युवक ने शादी न होने पर उलहाने न सहते हुए अपना गुप्तांग ही काट डाला। इतना ही नहीं गत सप्ताह एक पिता ने जब बेटे को मोबाइल फोन का इस्तेमाल न करने के लिए डांटा तो उसने पिता के रिवाल्वर से खुद को गोली मारकर अपनी ईहलीला समाप्त कर ली। पिछले दो माह में अभी तक तवी नदी और चिनाब दरिया में डूबकर चार युवतियों द्वारा खुदकुशी करने की घटनाएं कहीं न कहीं युवाओं में बढ़ते तनाव को उजागर करती हैं।

युवाओं को भी सोचना होगा कि जिंदगी दोबारा नहीं मिलती। इसे यूं ही तनाव में आकर ना गंवाएं, बल्कि जिंदगी में आने वाली कठिनाइयों का डटकर मुकाबला करें। पढ़ाई में असफल रहने के कारण कुछ बच्चों पर मानसिक दबाव बढ़ रहा है। हर परिवार की अपने बच्चों से ज्यादा अपेक्षाएं होती हैं। अधिकतर युवा जिंदगी में आने वाली समस्याओं को बर्दाश्त नहीं कर पाते और वे अपनी बात किसी से साझा तक नहीं करते। अगर कोई भी व्यक्ति तनाव से ग्रस्त है तो इसका समाधान है।

वे अपना दर्द अपने दोस्तों या निकट संबंधी से साझा कर सकते हैं। अगर वे यह न भी करें तो वे काउंसलिंग भी ले सकते हैं। अभिभावकों को भी चाहिए कि वे पढ़ाई के लिए बच्चों पर दबाव न डालें। नंबर गेम के बजाय बच्चे की प्रतिभा को समङों। जरूरी नहीं है कि जो बच्चा कम नंबर ला रहा है, उसमें प्रतिभा नहीं है। अभिभावक अक्सर अपने बच्चों की तुलना आस-पड़ोस के बच्चों से करते हैं और बाद में उलहाने देते हैं, जिससे बच्चे तनावग्रस्त हो जाते हैं। अभिभावकों को इससे परहेज करना चाहिए और अधिक से अधिक वक्त बच्चों को देना चाहिए।




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