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झारखंड में नक्सली खौफ की विदाई, अब आई पर्यटन की बारी

कभी नक्‍सलियों का गढ़ माना जानेवाला पेशरार प्रखंड इन दिनों अपनी हसीन वादियों के लिए चर्चा में है। यहां से नक्‍स‍ली खौफ की विदाई हो चुकी है तो अब पर्यटन विकास की बारी आ गई है। अति नक्‍सल प्रभावित होने के कारण ही इस इलाके के मनमोहक नजारे कभी लोगों के सामने नहीं आ सके थे। नक्सलियों ने इस खूबसूरती को कभी बाहरी दुनिया से जुड़ने ही नहीं दिया। यह वही इलाका है जहां आज से कुछ साल पहले लोग नक्‍सली खौफ के कारण जाने से भी डरते थे। आसपास के गांवों में बसे लोगों का भी पल-पल दहशत और आतंक के साये में गुजरता था। बंदूकों से गोलियां चलने की आवाज और बम धमाके ही इस दुर्गम इलाके की वीरानी में हलचल पैदा करते थे। आज हालात अलग हैं। सुरक्षाबलों और पुलिस के नक्सलविरोधी अभियान के बाद अब नक्सली यहां से पलायन कर चुके हैं।

नक्सली भागे तो मनोरम नजारों ने ध्यान खींचा 

इस इलाके से नक्सली भागे तो प्रकृति के मनोरम नजारों ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा। पेशरार प्रखंड के लावापानी, केकरांग, कुडू के नामुदाग, सेन्हा के धरधरिया जलप्रपात सैलानियों को खूब लुभा रहे हैं। यहां के अन्य नदी-पहाड़, झील व झरनों के सौंदर्य का नजदीक से आनंद लेने भी लोग पहुंचने लगे हैं, जिससे पर्यटन स्थलों की फिजां बदलने लगी है। आतंक की शरणस्थली और खौफ की वजह बने पर्यटन स्थल अब सेल्फी प्वांइट बन चुके हैं। एक साल पहले तक जिन पर्यटन स्थलों की पहचान नक्सल गढ़ और गोलियों की तड़तड़ाहट के रूप में थी, अब वहां पर लोगों की खिलखिलाहट गूंज रही है।

नए साल में पहली बार होगा नव प्रभात का स्वागत
जिले में अब तक कंडरा, नंदगांव, नंदनी डैम आदि स्थानों पर पहुंचकर जिलेवासी नये साल का स्वागत करते थे। अस बार के नए साल की पहली सुबह खास होगी। लोग इस साल पहली बार पेशरार प्रखंड के लावापानी, केकरांग, कुडू के नामुदाग, सेन्हा के धरधरिया में नव प्रभात का स्वागत करेंगे। इसके लिए लोग अभी से ही योजना बनाने में जुटे हैं। लोगों के लिए प्रकृति के बीच नए साल के स्वागत की अलग की उमंग नजर आ रही है।

प्रकृति ने दी हैं अनमोल नेमतें
पेशरार इलाके को प्रकृति ने बहुत सारी नेमतें दी है। यहां की सुंदरता को देख कर लोग मोहित हो जाते हैं। ऐसा लगता है मानो प्रकृति ने बड़े ही मनोयोग से इस इलाके को सजाया है। जबकि अन्य खूबसूरत नदी-नाले व पहाड़ भी बरबस अपनी ओर ध्यान खींचते हैं। लोहरदगा जिला मुख्यालय से लगभग 52 किमी की दूरी पर स्थित लावापानी जलप्रपात है। सात स्तरों पर पानी गिरने का अनुपम दृश्य यहां हर किसी को आकर्षित करता है। इसी तरह जिला मुख्यालय से 25 किमी की दूरी पर स्थित केकरांग झरना भी लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता है।

खूबसूरत नजारों पर एसपी ने लिखी थी किताब
हाल ही में लोहरदगा के निवर्तमान एसपी कार्तिक एस ने ‘मॉनसून पेशरार’ के नाम से एक किताब लिखी। इस पुस्तक में पेशरार की हसीन वादियों का जिक्र है। इस किताब के प्रकाशित होने के बाद लोगों का ध्यान यहां के खूबसूरत प्राकृतिक नजारों की ओर गया। सरकार भी अब पेशरार प्रखंड क्षेत्र को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की योजना बना रही है।

पर्यटन स्थलों के रूप में विकसित करने का प्रयास तेज 
पिछले दिनों राज्य के पर्यटन सचिव राहुल शर्मा ने इस इलाके को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के उदेश्य से कर्नाटक से कंसल्टेंट को बुलाकर उनके साथ इस क्षेत्र का भ्रमण किया और यहां पर्यटन की संभावना तथा इन स्थलों को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने पर विस्तार से चर्चा की। पर्यटन सचिव के साथ जिले के उपायुक्त विनोद कुमार, एसपी कार्तिक एस एवं डीएफओ भी थे। अधिकारियों के दल ने दुर्गम इलाके में घंटो पैदल भ्रमण किया।

क्‍या कहते हैं लोग
पेशरार में दुकान चलाने वाले परमेश्वर उरांव का कहना है कि हमने तो अब जाकर आजादी पाई है। जब तक नक्सलियों का खौफ रहा तब तक बाहरी लोगों का यहां आना और विकास की बात तो दूर यहां पर स्थानीय लोग भी सूरज ढलते ही घरों में दुबक जाते थे, अब तो हम खुल कर सांस ले रहे हैं। लोग अब पेशरार को नक्सल गढ़ नहीं बल्कि प्रकृति के मनोरम स्थल के रूप में देखते हैं।
केकरांग निवासी बुधराम असुर का कहना है कि अब जाकर विकास नजर आने लगा है। वे केकरांग के झरने को बचपन से देखते आ रहे हैं, परंतु उन्हें कभी यह अहसास नहीं हुआ कि यह इतना सुदंर है। लोगों की भीड़ केकरांग झरने में जुटने से इसका अब अलग ही सौंदर्य नजर आता है। यह सब नक्सली खात्मे के कारण और विकास के कारण हुआ है। सड़क बनने, लोगों की आवाजाही बढऩे से क्षेत्र अब गुलजार नजर आ रहा है।

स्वच्छता अभियान का भी दिख रहा असर
सुखद बात यह है कि हाल में स्वच्छता अभियान की किरण पेशरार जैसे दुरुह इलाके में भी पहुंची है। जिला प्रशासन ने प्राथमिकता के तौर पर घर-घर शौचालय का निर्माण करा कर पूरे प्रखंड को खुले में शौच से मुक्त प्रखंड बना दिया है।

तीन महीने पहले ही पहुंची है बिजली
पिछली जनगणना के मुताबिक 74 गांवों वाले पेशरार की कुल आबादी 31057 है। नक्सलियों के आतंक ने यहां आबतक न बिजली की रोशनी पहुंचने दी थी न विकास की। एक साल पहले झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास ने अपने पेशरार दौरे के क्रम में पेशरार के हर गांव में बिजली पहुंचाने की घोषणा की थी। अब इस घोषणा का असर दिख रहा है। तीन महीन पहले यहां बिजली पहुंच चुकी है तो पूरे इलाके में सड़कों का निर्माण कार्य भी चल रहा है।

विकास से बदल रही तस्वीर 
लोहरदगा के उपायुक्त विनोद कुमार का कहना है कि पेशरार ही नहीं जिले के सभी ऐसे क्षेत्र जो नक्सली भय के कारण अब तक पर्यटकों से दूर थे, अब वहां विकास के माध्यम से तस्वीर बदल रही है। लोगों में पर्यटन के प्रति विश्वास जगा है. जिससे इन क्षेत्रों में बदलाव नजर आ रहा है। हमारा सारा ध्यान अब इन क्षेत्रों तक यातायात सुविधा को बेहतर बनाना और सड़क मार्ग को दुरुस्त करना है। पेशरार के लिए भी पर्यटकों के लिए जल्द ही विशेष बस सेवा का शुभारंभ होगा।

आम लोगों का भी मिला साथ

लोहरदगा के एसपी कार्तिक एस का कहना है कि पर्यटन पेशरार क्षेत्र की विरासत है। पर्यटन विकास के लिए पुलिस प्रशासन को आम लोगों का काफी साथ मिला है। लोगों ने बदलाव को स्वीकार किया है। इस कारण अब यहां की तस्वीर बदल चुकी है। अभी काफी काम किया जाना शेष है।

17 साल पहले उग्रवादियों ने कर दी थी एसपी अजय सिंह की हत्या
पेशरार वही इलाका है जहां आज से 17 साल पहले 4 अक्टूबर 2000 को उग्रवादियों ने लोहरदगा के तत्कालीन एसपी अजय कुमार सिंह की हत्या कर दी थी। पेशरार एक्शन प्लान के तहत अब प्रखंड में तेजी से विकास कार्य हो रहे हैं। यहां सुरक्षा के दृष्टिकोण से एक ओपी भी बनाया गया है। ओपी में शहीद एसपी अजय कुमार सिंह की मूर्ति भी स्थापित की गई है।

कई नक्सलियों ने किया है आत्मसमर्पण
हाल के वर्षों में इस इलाके में सक्रिय उग्रवादी संगठन भाकपा माओवादी के कई नक्सलियों ने सरकार की नीति से प्रभावित होकर आत्मसमर्पण किया। पुलिस ने कई बच्चों को नक्सलियों के चंगुल से मुक्त भी कराया। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों में भाकपा माओवादी के इनामी रिजनल कमांडर नकुल यादव, जोनल कमांडर मदन यादव, एरिया कमांडर विशाल खेरवार उर्फ रामधनी खेरवार व कलेश्वर खेरवार, सबजोनल कमांडर हरेंद्र उरांव उर्फ हरिविलास उर्फ हरिलाल उरांव, दस्ता सदस्य चंदेश्वर उर्फ चंदू उरांव, जीतेंद्र गंझू उर्फ जीवन गंझू, सुखराम खेरवार, सुशांति उरांव, सीमा उरांव, सुखलाल नगेशिया व मीना उरांव उर्फ कविता उरांव आदि शामिल हैं। इसके अलावा एक दर्जन बच्चों को नक्सली संगठन से मुक्त कराया गया है।

पेशरार में अब तक की नक्सली गतिविधियां
– वर्ष 2000 में 4 अक्टूबर को तत्कालीन एसपी अजय कुमार सिंह को पीडब्ल्यूजी के नक्सलियों ने लैंड माइंस विस्फोट और गोली मारकर हत्या कर दी थी।
– वर्ष 2009 में चुनाव कराकर लौट रही पुलिस पार्टी पर केकरांग घाटी में माओवादियों ने हमला कर दिया था। इसमें दो पुलिसकर्मी शहीद हुए थे।
– सेन्हा थाना क्षेत्र के धरधरिया में 3 मई 2011 को नक्सल ऑपरेशन से लौट रहे सीआरपीएफ के जवानों के साथ जिला पुलिस बल के जवानों पर माओवादी संगठन के नक्सलियों ने 195 सीरियल लैंड माइंस विस्फोट किया था। इसमें जिला पुलिस बल और सीआरपीएफ के 11 जवान शहीद हुए और 60 पुलिसकर्मी जख्मी हुए थे।
– वर्ष 2014 में पुलिस को मदद करने का आरोप लगाकर तीन लोगों के घर पुतरार व चैनपुर में जला दिए गए थे।
– वर्ष 2000 से लेकर 2016 तक पुलिस के सहयोग करने के आरोप में कई लोगों को मार डाला गया।
– दिसंबर 2016 में नक्सलियों के साथ बुलबुल में सीआरपीएफ व सैट के साथ मुठभेड़ हुई थी।
– नक्सलियों ने डेढ़ दशक के दौरान पेशरार में कई नक्सली घटना को अंजाम दिया, जिसमें कई वाहन जलाने, घर जलाने, हत्या, विकास कार्य को प्रभावित करने वाली घटनाएं शामिल हैं।




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