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‘नन-मैट्रिक’ गांव की चार बेटियां रचने जा रही हैं इतिहास

आजादी के 70 बाद भी बिहार में एक गांव ऐसा भी है जहां एक भी व्यक्ति मैट्रिक पास नहीं है. गोसलवार गांव दरभंगा जिला मुख्यालय से महज 3 किलोमीटर की दूरी पर बहादुरपुर प्रखंड में स्थित है.

करीब 1200 आबादी वाले इस गांव में हाईस्कूल और मिडिल स्कूल की बात छोड़ दीजिए प्राइमरी स्कूल भी नहीं है. लेकिन तमाम दिक्कतों के बावजूद पॉजिटिव बात यह है कि इस गांव की 4 बेटियां अपनी मजबूत इच्छाशक्ति के कारण इतिहास रचने जा रही है.

इस गांव के विश्वनाथ सहनी की बेटी कविता कुमारी, बिंदेश्वर सहनी की बेटी पूजा कुमारी, कन्हैया सहनी की बेटी नेहा कुमारी और कुशेश्वर सहनी की बेटी गीता कुमारी साल 2018 में मैट्रिक की परीक्षा में बैठने जा रही हैं. ये सभी लड़कियां गांव से 7 किलोमीटर आनंदपुर बालिका हाईस्कूल की स्टूडेंट हैं.

छात्रा नेहा कुमारी का कहना है कि गांव में स्कूल नहीं है लिहाजा हमलोगों को पढ़ने में काफी दिक्कत होती है. हमलोगोें को 7 किमी दूर स्कूल जाना पड़ता है. कई बार देर होने पर डांट भी सुनना पड़ता है. वहीं, छात्रा कविता कुमारी ने कहा कि इस गांव से हमलोग पहली बार मैट्रिक का एग्जाम दे रहे हैं. हमलोगों की कोशिश है कि अच्छे मार्क्स से पास कर गांव का नाम रोशन करें.


आनंदपुर हाईस्कूल के प्रिंसिपल अरुण कुमार झा ने कहा कि हमलोग इस बात से काफी गर्व महसूस कर रहे हैं कि आजादी के 70 साल बाद गोसलवार गांव की लड़कियां मैट्रिक परीक्षा दे रही हैं. हमलोग इनकी मदद कर रहे हैं और अगर ये छात्राएं पास करती हैं तो हमलोग इन्हें पुरस्कृत भी करेंगे.

जिला मुख्यालय से महज 3 किमी की दूरी पर स्थित गोसलवार गांव में ना तो कोई आंगनबाड़ी केंद्र है और ना ही कोई स्वास्थ्य उपकेंद्र. गांव को जोड़ने के लिए कोई पक्की सड़क भी नहीं है. गांव के ज्यादातर लोग मजदूरी करते हैं. बच्चे स्कूल जाने के बजाय अपनी दिनचर्या के रुप में बकरी चराना, घास काटना, जलावन चुनने का काम करते हैं.

वार्ड सदस्य गिरिवन सहनी ने बताया कि इस संबंध में हमलोग कई बार स्थानीय बीडीओ और सीओ से गुहार लगा चुके हैं लेकिन अभी तक कोई बुनियादी सुविधाएं मयस्सर नहीं है. 12 साल पहले गांववालों ने मिलकर प्रशासन को जमीन भी उपलब्ध कराई थी और प्राथमिक विद्यालय खोला गया था लेकिन सरकार की उदासीनता के कारण इस स्कूल गांव को रामनगर में शिफ्ट कर दिया गया.

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स्कूल जाती गांव की बेटियां (ईटीवी फोटो)
 गांव की बुजुर्ग महिला सीमा देवी ने बताया कि मैं मरनेे की कगार पर हूं. आज समाज में शिक्षा का काफी महत्व है. मैं चाहती हूं कि सरकार गांव में स्कूल और दूसरी सुविधाएं जल्द उपलब्ध कराएं.

इस संबंध में बहादूर प्रखंड विकास पदाधिकारी अविनाश कुमार ने स्वीकार किया कि  गांव में बुनियादी सुविधाएं नहीं है. हालांकि सरकारी भाषा में उन्होंने आश्वसान जरुर दिया कि जल्द ही इस आंगनबाड़ी, प्राथमिकी विद्यालय, सड़क, गली-नली जैसी बुनियादी सुविधाएं जल्द उपलब्ध करा दी जाएगी.

सरकारी अधिकारियों के दावों के बावजूद गांव में बुनियादी सुविधाएं कब होगी, किसी को पता नहीं है लेकिन गांव में इस बात को लेकर जश्न जैसा माहौल है. गांव की चार बेटियां आजादी के 70 साल बाद मैट्रिक एग्जाम पास कर नाम रौशन करेंगीं.




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