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डबल इंजन’ लगने के बाद भी बिहार में विकास ने नहीं पकड़ी है रफ्तार

बिहार में एनडीए की सरकार बनी तो इसे डबल इंजन वाली सरकार का नाम दिया गया, कारण केंद्र और बिहार दोनों जगह एक की गठबंधन की सरकार का रहना. लेकिन डबल इंजन लगने के बाद भी बिहार के प्रति केंद्र की उपेक्षा कम नहीं हुई है.

ये हम नहीं बल्कि वो आंकड़े और रिपोर्ट कह रहे हैं जो बिहार में नई सरकार के बनने के बाद सामने आये हैं. बिहार में पिछले साल बाढ़ से 19 जिलों में भारी नुकसान हुआ था. इसके बाद बिहार सरकार ने केंद्र से मदद की गुहार भी लगायी थी लेकिन अभी तक बिहार को कुछ मिला नहीं है जबकि केंद्र और बिहार में एनडीए की ही सरकार है.

डबल इंजन लगने के बाद भी बिहार को न तो केंद्र से विशेष राज्य का दर्जा मिला और न ही बाढ़ राहत के लिए मदद. पिछले साल बिहार में बाढ़ एक करोड़ 71 लाख लोग प्रभावित हुए थे और राज्य के 19 जिलों में बड़ी बर्बादी हुई थी. पीएम भी दौरा किये थे लेकिन कई महीने बाद भी कुछ हुआ नहीं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सात हजार छह सौ करोड़ की मदद का मेमोरेंडम भेजा था, लेकिन अभी भी इस मुआवजे को देने की प्रक्रिया फाइलों पर ही चल रही है जबकि केंद्र के साथ बिहार में भी एनडीए की सरकार है.

इस मामले में बिहार के आपदा प्रबंधनमंत्री का कहना है कि डबल इंजन लग गया है इसका मतलब यह थोड़े है कि हम लोग बोरा लेकर गये और पैसा भर ले आये. मंत्री के मुताबिक अनुदान मिलना एक विपक्ष तो कुछ भी आरोप लगाते रहेगा. इस मामले में राजद के नेता पहले से ही नीतीश कुमार पर हमला करते रहे हैं अब तंज कसते हुए कह रहे हैं कि नीतीश तो बीजेपी के सामने नतमस्तक हो चुके हैं.




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