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लालू यादव ने की सीबीआई जज को ‘घूस’ की पेशकश!

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव अपने चुलबुले अंदाज के लिए जाने जाते हैं. शायद ही ऐसा कोई मिमिक्री आर्टिस्ट हो, जिसने उनकी मिमिक्री न की हो. इसकी वजह है उनके बातचीत करने का भदेस अंदाज, जिसे सुनकर किसी की भी हंसी छूट जाए. चुनावी रैलियों से लेकर लोकसभा में भी उन्हें ऐसे ही बोलते देखा गया है. उनकी बातों को सुनकर हंसी आ ही जाती है. ऐसा ही वाकया 10 जनवरी को भी हुआ, जब लालू की बातों को सुनकर सीबीआई के विशेष जज शिवपाल सिंह भी अपनी हंसी नहीं रोक पाए.

चारा घोटाले में साढ़े तीन साल की जेल की सजा काट रहे लालू यादव की 10 जनवरी को चारा घोटाले के ही एक और मुकदमे में पेशी थी. मुकदमा चाइबासा ट्रेजरी से अवैध तरीके से पैसे निकालने का था. इस मामले की सुनवाई भी वही जज शिवपाल सिंह कर रहे थे, जिन्होंने लालू यादव के खिलाफ साढ़े तीन साल की सजा और पांच लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई थी. लालू जब पेशी पर आए, तो उन्होंने जज शिवपाल सिंह से कहा-

“अगर रिहा होकर घर चले जाते, तो आपको अपने घर बुलाते. वहां आपको दही-चूड़ा खिलाते.”

इस पर जज शिवपाल सिंह ने कहा-

“चिंता मत कीजिए. यहीं दही-चूड़ा खा लीजिए. आप बोलिए, कितना दही-चूड़ा का आदेश कर दें. तिलकुट भी साथ में रहेगा”

मकर संक्रांति पर लालू यादव की ओर से हर साल दही-चूड़ा की दावत दी जाती थी.

इसके अलावा दोनों के बीच और भी लंबी बातचीत हुई.  दोनों के बीच जेल की सुविधाओं से लेकर ओपन जेल और भी कई मुद्दों पर बात हुई.

लालू : हुजूर! जो केस आपके पास है, उसका फैसला जल्दी कर दीजिए.

जज : अभी सुनवाई चल रही है. फैसला हो जाएगा.

लालू : हम नेता हैं. जहां जाते हैं, भीड़ जमा हो जाती है. आप मुझे ओपेन जेल मत भेजिए. अगर मुझे ओपेन जेल भेजा जाएगा, तो हजारों लोग मुझे छोड़ने के लिए जाएंगे. इसके लिए पूरे झारखंड की पुलिस लगानी होगी.

जज : ऐसा नहीं होगा. इसमें कानून अपना काम करेगा. कोर्ट आदेश देगी, तो सबको रोका जाएगा.

लालू : हुजूर! अगर ऐसा होगा तो झारखंड में नरसंहार हो जाएगा.

जज : नहीं होगा. कानून अपना काम करेगा.

लालू : हुजूर! जेल में मुझे टॉर्चर किया जा रहा है. सात दिन में तीन लोगों से ही मुझे मिलने दिया जा रहा है. ऐसा तो किसी भी जेल में नहीं होता है, फिर यहां क्यों हो रहा है?

जज : इसके लिए देखना पड़ेगा कि जेल मैनुअल क्या कहता है. उसके हिसाब से काम किया जाएगा.

लालू : हुजूर ! आप जेल प्रशासन को आदेश दे दीजिए. प्रशासन का रवैया ठीक नहीं है. आप बुलाएं हैं, तो हम जल्दी से तैयार हुए और बिना कुछ खाना खाए भागे-भागे कोर्ट आ गए.

जज : खड़े क्यों हैं? बैठ जाइए. आप तो कोर्ट के मेहमान हैं.

लालू : हुजूर, आपके कहने का इंतजार था. अब बैठ जाते हैं. ऐसे ही कृपा बनाए रखिएगा. जो अगला केस आपके पास है, उसमें ढाई साल की ही सजा दीजिएगा.

जज : आप लोगों को दिक्कत नहीं हो, इसलिए कोर्ट में बुलाते हैं.

लालू यादव पर दो और मामलों में फैसला आना बाकी है.

लालू : हमलोगों को कुछ होगा, तो जिम्मेदार आप ही होंगे. कोर्ट आते हैं, तो थोड़ी-बहुत धक्का-मुक्की, ठेला-ठेली हो जाती है.

जज: हमें पता है. आप कहें, तो पूरा कोर्ट परिसर खाली करवा दें.

लालू : हुजूर, मैंने बताया था कि हमने भी लॉ किया है. हुजूर ने डिग्री देने को कहा, वह भी दे दिया. फिर भी आपने तीन साल की जगह साढ़े तीन सजा दे दी.

जज : सजा देने में कई बातों पर गौर करना होता है. हमारे ऊपर भी कोई है. जिस दिन सजा पर सुनवाई पूरी हुई, मैंने हर बिंदुओं पर सोच-समझकर साढ़े तीन साल और सात साल की सजा सुनाई.

लालू : कोई बात नहीं. आगे भी आपके यहां केस है. रहम कर दीजिएगा.

जज : हां, हां.

लालू : सोचे थे, इस बार घर परिवार के साथ दही-चूड़ा खायेंगे, लोगों को खिलाएंगे. लेकिन सब छूट गया.

जज : कोई बात नहीं. आप जेल में 14 जनवरी को मकर संक्रांति मनाएं. दही-चूड़ा और तिलकूट का आदेश कर देते हैं. खुद भी खाएं और बाकी साथियों को भी खिलाएं.

लालू : रिहा होकर घर चले जाते, तो आपको घर बुला कर दही-चूड़ा खिलाते.

जज : चिंता मत न कीजिए, बोलिए -कितना दही-चूड़ा का आदेश कर दें. अरे हां, तिलकूट भी रहेगा.

लालू यादव के घर दही-चूड़ा की दावत में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी शामिल हो चुके हैं.

लालू : हम तो यादव हैं, यह विभाग तो हमारा है, कितना चूड़ा और कितना दही बताएं. बस आप छोड़ देते तो चार दिन यही जंगल में बिताते.

जज : आपको अपने लोग ही फेरा में डाल देता है. शहाबुद्दीन को देखे न. सैकड़ों का काफिला लेकर चलता था, टोल टैक्स नहीं देता था. फंस गया.

लालू यादव और विशेष सीबीआई जज के बीच बातचीत के बाद लालू यादव को वापस बिरसा मुंडा जेल भेज दिया गया. वहीं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंंत्री योगी आदित्यनाथ ने उन दो अधिकारियों के खिलाफ जांच के आदेश दे दिए हैं, जिन्होंने लालू यादव की पैरवी के लिए जज शिवपाल सिंह को फोन किया था. लालू यादव के खिलाफ फैसला सुनाते वक्त जज शिवपाल सिंह ने कहा था कि आपके शुभचिंतकों के फोन आ रहे हैं. इन शुभचिंतकों में एक नाम जालौन के डीएम मन्नान अख्तर का भी है. आरोप है कि डीएम मन्नान अख्तर ने जज शिवपाल सिंह को फोन कर कह था कि आप ही लालू का केस देख रहे हैं, जरा देख लीजिएगा. नाम सामने आने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने झांसी के कमिश्नर अमित गुप्ता को मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं.




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