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झारखंड भाजपा में बढ़ी रार, असंतुष्ट विधायकों की कमान संभाल सकते हैं सरयू राय

झारखंड में सत्तारूढ़ भाजपा में अंतर्विरोध और बढ़ गया है। असंतुष्ट आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं और सरकार भी किसी तरह से समझौते के मूड में नहीं दिख रही है। सरयू राय के कड़े तेवर के बाद सरकार ने भी मान-मनौव्वल के बदले ग्रामीण विकास मंत्री नीलकंठ सिंह मुंडा को संसदीय कार्यमंत्री बना दिया। इस बाबत अधिसूचना जारी कर दी गई और प्रस्ताव राजभवन भेज दिया गया है।

इसके बाद से यह चर्चा तेज हो गई है कि राय खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री के पद से भी इस्तीफा देकर असंतुष्ट विधायकों की कमान अपने हाथ में ले लेंगे। भाजपा के आठ विधायक खुलकर विरोध जता चुके हैं। इन विधायकों ने सरयू राय के साथ ही पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा से भी मुलाकात की है। सरयू राय नीतिगत मसलों पर आरंभ से ही मुख्यमंत्री रघुवर दास और उनके नजदीकी अफसरों को घेरते रहे हैं। खनन पट्टा आवंटन से लेकर सरकार द्वारा शराब बेचने तथा बड़ी संख्या में राशन कार्ड रद करने का भी उन्होंने विरोध किया था।

उन्होंने चारा घोटाला के एक मामले में विवादों में आई मुख्य सचिव राजबाला वर्मा को भी हटाने की मांग सार्वजनिक मंच से उठाई। इससे विपक्ष को बल मिला। बदली राजनीतिक परिस्थिति में वे रघुवर दास से नाराज चल रहे विक्षुब्ध विधायकों की कमान संभालेंगे, ऐसी चर्चा है। मुहिम इस स्तर पर तेज होगी कि विधायकों की संख्या बढ़ाई जाए। दिल्ली से लौटने के बाद सरयू राय इस्तीफे का निर्णय ले सकते हैं।

उधर, ग्रामीण विकास मंत्री नीलकंठ सिंह मुंडा को संसदीय कार्यमंत्री की भी जिम्मेदारी देने के साथ ही हाइप्रोफाइल इस राजनीतिक ड्रामे के पहले दृश्य का पटाक्षेप हो गया है। विधानसभा सत्र के दौरान विपक्ष के कड़े प्रहार से आहत सरकार उससे निकलने का किसी तरह रास्ता निकालने में जुटी ही थी कि वरिष्ठ भाजपा नेता सरयू राय ने अप्रत्यक्ष रूप में सत्र के चलने के लिए सरकार को घेरते हुए पद छोड़ने की इच्छा जता दी। हालांकि, तब उन्होंने खाद्य आपूर्ति मंत्री के पद के बारे में कुछ भी स्पष्ट नहीं किया था। शुरू में संसदीय कार्यमंत्री पद के लिए सीपी सिंह का नाम उछला था लेकिन सिंह के रुचि न लेने के बाद नीलकंठ सिंह मुंडा का नाम सामने आया।

गौरतलब है कि सरयू राय ने मुख्यमंत्री रघुवर दास को पत्र लिखकर स्वयं इस विभाग को छोड़ने की इच्छा जताई थी। विधानसभा के बजट सत्र के दौरान सरयू राय के इस रुख ने राज्य सरकार को असहज भी किया। बजट सत्र के अंतिम दिन उन्होंने सदन की कार्यवाही से खुद को दूर रखा। उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष दिनेश उरांव से भी गुहार लगाई थी कि उन्हें विधानसभा में अलग से बैठने की सीट दी जाए। संसदीय कार्यमंत्री होने के नाते उनकी सीट सदन के नेता यानी मुख्यमंत्री रघुवर दास की दायीं ओर थी।

अर्जुन मुंडा के यहां बैठक, राधाकृष्ण किशोर भी पहुंचे

बदली राजनीतिक परिस्थिति में गोलबंदी तेज हो गई है। गुरुवार की शाम मंत्री सरयू राय पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा से मिलने जेल चौक स्थित उनके सरकारी आवास पहुंचे। दोनों नेताओं के बीच लगभग 45 मिनट की गुफ्तगू हुई। इस बीच, सत्तारूढ़ दल के मुख्य सचेतक राधाकृष्ण किशोर भी पहुंच गए। हालांकि उन्होंने बताया कि वे अपनी पुत्री की शादी का निमंत्रण देने गए थे। कयास लगाया जा रहा है कि राधाकृष्ण किशोर फिलहाल मध्यस्थता की कोशिश कर रहे हैं।

सरयू राय जाएंगे दिल्ली, होगी झारखंड की पंचायत

रघुवर सरकार में सब ठीक नहीं चल रहा। मुख्यमंत्री रघुवर दास को लेकर वरिष्ठ नेताओं में कुछ नाराजगी है। पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा और मंत्री सरयू राय से भाजपा के कुछ मंत्रियों और विधायकों ने मुलाकात की है। स्थानीय नीति को लेकर खुले तौर पर दो दर्जन विधायक रघुवर दास से भी मिल चुके हैं। इसी कड़ी में मंत्री सरयू राय दिल्ली जाएंगे और वहां आलाकमान को वर्तमान राजनीतिक हालात से अवगत कराएंगे। मंत्री सरयू राय से संसदीय कार्य मंत्री का दायित्व लेकर नीलकंठ सिंह मुंडा को दे दिया गया है।

अब आगे क्या

-सरयू राय ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से मिलने का वक्त मांगा है। वह चार फरवरी को दिल्ली जाने वाले हैं।

-दिल्ली में शाह समेत प्रमुख नेताओं को विधायकों की पसंद-नापसंद बताई जाएगी।

-आने वाले दिनों में तेज होगी रस्साकशी। मुख्यमंत्री रघुवर दास भी लगाएंगे जोर।




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