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दारोगा भर्ती : गलती किसी और ने की, सजा कोई और भुगत रहा

खता किसी की सज़ा किसी और को. हां, ऐसा ही है. यहां झारखंड में किसी की गलती की सजा कोई और भुगत रहा है. झारखंड के 42 बर्खास्त दारोगा परीक्षा की तमाम प्रक्रिया को पूरी कर दारोगा बने थे. ढाई साल नौकरी की मगर रातों रात सड़क पर आ गए. इन्हें कहा गया कि नई मेरिट लिस्ट में इनके नाम नहीं हैं. हां, ढाई साल नौकरी कर लेने के बाद इनके साथ ऐसा हुआ.

बर्खास्त दारोगा पुरुषोत्तम यादव की पत्नी बेबी यादव कहती हैं कि मालूम नहीं किस गलती की सजा हमलोगों को मिली है. बाहर के लोग हमारे परिवार को अचरज भरी निगाहों से देखते हैं. उन्हें लगता है कि कुछ गलत किया होगा, इसीलिए नौकरी से निकाल दिया गया. हमलोगों को खुद पता नहीं है कि हमने क्या गलती की है. हमारा परिवार सड़क पर आ गया है. अब हम जैसे तैसे जीवन यापन करने को मजबूर हैं.

बेबी यादव के पति को किसी जुर्म या भ्रष्टाचार के कारण नहीं बल्कि व्यवस्था की खामियों के कारण या यूं कहें कि बलि का बकरा बना दिया गया. नौकरी जाने के साथ ही न सिर्फ आर्थिक परेशानियां शुरू हुई बल्कि समाज में जो मान प्रतिष्ठा बनी थी वो भी धूल धूसरित हो गई. आज इस पूर्व दारोगा का घर कलह का एक अखाड़ा बन गया है और दारोगा साहेब नौकरी को लेकर अपनी मजबूरियां गिना रहे हैं.

बेबी यादव के पति पुरुषोत्तम यादव कहते हैं कि दो अफसरों के बीच के रंजिश की सजा हमलोगों को भुगतना पड़ रहा है. उन दो अफसरों की आपसी लड़ाई के कारण 42 लोगों का भविष्य खराब हो गया. सिर्फ 42 लोग नहीं बल्कि 42 परिवारों का भविष्य अंधकारमय हो गया.

पुरुषोत्तम इस स्थिति को झेलने वाला अकेला शख्स नहीं हैं. इनके जैसे और 41 लोग हैं जो ढाई साल तक किसी न किसी जिले में बतौर दारोगा रहने के बाद आज चार साल से सड़क पर मारे मारे फिर रहे हैं. ऐसा नहीं है सरकार के इस कार्रवाई का इन्होंने विरोध नहीं किया. इन्होंने सरकार के निर्णय के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की. हाईकोर्ट के सिंगल बेंच ने इनके हक में फैसला दिया और चार हफ्ते में दुबारा नौकरी में बहाल करने का आदेश दिया. लेकिन पुलिस मुख्यालय ने अदालत के आदेश की परवाह नहीं की. चार क्या छह सप्ताह बीतने पर भी दुबारा बहाल नहीं किया. तब इन्होंने हाईकोर्ट में अवमानना की याचिका दायर की . फिर भी बात नहीं बनी.

आज मामला हाईकोर्ट में है. कोर्ट यह तय करेगा कि इन्हें दुबारा नौकरी में रखा जाए या नहीं. लेकिन इस स्थिति में पहुंचाने वाले अधिकारियों और व्यवस्था से जुड़े लोगों पर सरकार की तरफ से कोई कार्रवाई नहीं करना यह बताता है कि खता किसी की और सजा किसी और को.




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