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राम मंदिर-बाबरी मस्जिद मामला: अगली सुनवाई 14 मार्च को, देना होगा 42 किताबों का अनुवाद

सुप्रीम कोर्ट में आयोध्या विवाद पर सुनवाई फिर एक बार 14 मार्च तक टल गई। दरअसल, कुछ दस्तावेजों का ट्रांसलेशन पूरा नहीं हो पाया था। सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में पक्षकार रहे लोगों से वहां पेश किए गए दस्तावेजों की कॉपी और कुछ किताबों की अंग्रेजी में मांगी है। इन्हें दो हफ्ते में पेश करना है। इससे पहले इस केस पर 8 दिसंबर को भी सुनवाई हुई थी, उस वक्त भी दस्तावेजों का ट्रांसलेशन नहीं हो पाया था, इसलिए कोर्ट ने तारीख दो महीने और बढ़ा दी थी। तब कुल 19,590 पेज में से सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के हिस्से के 3,260 पेज जमा नहीं हुए थे।

हर दिन सुनवाई करने की मांग पर फैसला 14 मार्च को

– न्यूज एजेंसी ने हिंदू महासभा के वकील विष्णु शंकर जैन के हवाले से बताया कि दोनों पक्षों ने कोर्ट से इस केस की हर दिन सुनवाई करने की मांग की। इस पर कोर्ट ने कहा कि यह फैसला भी अगली सुनवाई के दिन 14 मार्च को किया जाएगा।

सुन्नी वक्फ बोर्ड ने लोकसभा चुनाव तक सुनवाई टालने की मांग की थी

उस वक्त सुनवाई टालने की मांग करते हुए बोर्ड के वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि यह केस सिर्फ भूमि विवाद नहीं, राजनीतिक मुद्दा भी है। चुनाव पर असर डालेगा। 2019 के चुनाव के बाद ही सुनवाई करें। हालांकि, कोर्ट ने इन दलीलों को बेतुका बताते हुए कहा- हम राजनीति नहीं, केस के तथ्य देखते हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों से कहा था- आगे नहीं टलेगी सुनवाई

– पिछली सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने अगली सुनवाई की तारीख 8 फरवरी तय की थी। उस वक्त उन्होंने कहा था कि उस दिन कोई भी डॉक्युमेंट्स के नाम पर सुनवाई टालने की मांग नहीं करेगा। सभी पक्ष अपने डॉक्युमेंट्स तैयार करें। दूसरे पक्षों के साथ बैठकर कॉमन मेमोरेंडम बनाएं। कोर्ट ने 11 अगस्त को 7 लैंग्वेज के डॉक्युमेंट्स का ट्रांसलेशन करवाने को कहा था।

 




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