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Category: नजरिया

बेईमानी के ये काम

व्यंग्य राही की कलम से सत्य कथा है। राधे ने सुनाई थी। एक बार...

प्रकृति से टूटते ये रिश्ते

व्यंग्य राही की कलम से उस देश और उसके बाशिंदों को सलाम करने को जी...

विधायिका को चर्चा का कितना हक? (जस्टिस सुनील अम्बवानी )

विचाराधीन मुकदमे, जो विभिन्न अदालतों में लंबित हैं, चाहे वो...

बोया पेड़ बबूल का…

व्यंग्य राही की कलम से अगर ‘अनैतिकता’ के पंक में पड़ा एक आदमी...

फिर उठी गठबंधन की बातें

जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के बाद...

आंतरिक और बाहरी चुनौतियां

 इतिहासकार आर्नोल्ड टायनबी ने अध्ययन किया है कि सभ्यताएं ऐसी...

मुक्तिबोध और हमारा समय

कवि मुक्तिबोध पर बात करते हुए हम शुरू करते हैं गुरमेहर कौर के उस...

विकास दर के आंकड़े : हकीकत या धोखा ?

देश के मुख्य सांख्यिकीविद ने बताया कि अक्टूबर-दिसंबर 2017 की...

लोकतंत्र की विफलता !

यह पहला मौका नहीं जब सुप्रीम कोर्ट को छोटे-छोटे मामलों के लिए...

बजट फूंक देंगे

ग्य राही की कलम से मार्च का महीना इसलिए जोरदार होता है इसमें दो...